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ग़रीबी जब भी मन से खिलाती है

ग़रीबी जब भी मन से खिलाती है तो कभी बेबस नहीं दिखती दहलीज़ पर आए अतिथि पर ग़रीबी जब प्यार लुटाती है तो कभी गुमसुम नहीं दिखती सच में जब ग़रीबी के आंगन में जब अमीर आता है कोई ख़शुी में डूब ग़रीबी इनती परेशान नहीं दिखती ज़रूर यह धोखा है,मुफ़लिसी का वर्ना ग़रीबी कभी अतिथि देवो भव: के आगे इतनी लाचार नहीं दिखती

चमत्कार नहीं करते मेरे शब्द

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चमत्कार नहीं करते मेरे शब्द ये सिर्फ भाव होते हैं किसी को चुभते हैं तो किसी को सुकून देते हैं ये गलतफहमी आपकी है कि मैं अंधियारे में हूँ मैं बिन सितारे उजाले में हूँ बाहर से ना देखे मुझे मेरे अन्दर झाक कर देखो चेहरे पर धुंध भले है मेरे पर मैं हर पल मुस्कुराता हूँ

माँ मुझे जन्म देना नहीं चाहती...

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पापा देखो ना माँ मुझे जन्म देना नहीं चाहती पापा माँ को समझाओ ना माँ मुझे गर्भ में ही क्यों मारना चाहती पापा, आप दोनों की खून हूँ मैं प्यार के खूबसूरत पहल की अनुपम तस्वीर हूँ मैं पापा, बहुत डरी और सहमी हूँ मैं पापा, मुझे साहस दो ना प्लीज पापा, मुझे अठ्ठाहस दो ना

इंसान अकेला क्यों हो जाता है?

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इंसान एक कारण से अकेला हो जाता है अपनों को छोड़ने की सलाह गैरों से लेता है
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शहर उनका था...शाम उनकी थी... हर खुशी में, हर लम्हे में पैगाम उनका था... देर तक मैं रहा उनके सामने... पास होकर भी वो मुझे देख ना सकी... आखिर नजरों में अंदाज किसका था... कभी बताऊँगा उन्हें, उनकी खिलखिलाहट के बारे में और पूछुंगा जरूर उन दर्द भरी आँखों में प्यार किसका था जानने का तो जानता हूँ, हर हकीकत उनसे सुनना चाहता हूँ... महफिले जज्बात किसका था...?

वजह ढूंढ ली होगी...

वजह ढूंढ ली होगी उसने जीने की कोई वर्ना मुहब्बत में कोई तन्हा नहीं रहता

हूँ आनन्द तो, ताउम्र आनन्द ही रहूँगा

चाहे वफा दो...या बेवफा बन जाओ जो हो मर्जी तुम्हारी, वो फैसला कर जाओ हूँ आनन्द तो, ताउम्र आनन्द ही रहूँगा हो तेरा कोई फैसला, मैं खुद को सवार लूंगा बस एक छोटी सी बात, सुन लो खामोशी से मुहब्बत में इंसाफ ना कर सके तो कोई बात नहीं बेवफाई में छोखा दोगे तो चुप नहीं बैठूंगा है ये वादा चाहा था जितना तुमको शिद्दत से मैं वो आशिक नहीं, बेवफा को सजोकर दिल में रखूँगा