शहर उनका था...शाम उनकी थी... हर खुशी में, हर लम्हे में पैगाम उनका था... देर तक मैं रहा उनके सामने... पास होकर भी वो मुझे देख ना सकी... आखिर नजरों में अंदाज किसका था... कभी बताऊँगा उन्हें, उनकी खिलखिलाहट के बारे में और पूछुंगा जरूर उन दर्द भरी आँखों में प्यार किसका था जानने का तो जानता हूँ, हर हकीकत उनसे सुनना चाहता हूँ... महफिले जज्बात किसका था...?
Comments
Post a Comment